apne lail-o-nahaar ki baatein | अपने लैल-ओ-नहार की बातें

  - Jafar Abbas
अपनेलैल-ओ-नहारकीबातें
जब्रकीइख़्तियारकीबातें
हरतरफ़कबसेहोरहीहैंयहाँ
गर्दिश-ए-रोज़गारकीबातें
चार-सूयाँपेमौजज़नहैंसराब
ज़ीस्तकेरेगज़ारकीबातें
इकज़मानागुज़रगयायूँँही
हमहैंऔरदश्त-ए-ख़ारकीबातें
इसकड़ीधूपमेंमज़ाहिबमें
शजर-ए-साया-दारकीबातें
हैज़मींसख़्तआसमाँचुपहै
वाहरेपरवरदिगारकीबातें
जिसकीइकभीझलकदेखीकभी
क्याहोंउसपर्दा-दारकीबातें
मतकरोबे-हिसारकीबातें
मतकरोबे-कनारकीबातें
येजोप्यारीज़मींमिलीहैतुम्हें
बसकरोइसदयारकीबातें
गरकरोअपनेदिलकीबातकरो
हाँइसीसोगवारकीबातें
  - Jafar Abbas
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