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Jabbar Jameel
mujhe paaniyon pe raqam karo
mujhe paaniyon pe raqam karo | मुझे पानियों पे रक़म करो
- Jabbar Jameel
मुझे
पानियों
पे
रक़म
करो
कि
मिरी
बिसात
ग़ुबार
है
जो
निशानियाँ
हैं
मिरी
यहाँ
उन्हें
बहर-ए-गर्द
में
ज़म
करो
मिरे
आँसुओं
मिरे
क़हक़हों
को
ख़याल-ओ-ख़्वाब
का
नाम
दो
मिरी
क़ुर्बतों
के
घने
शजर
को
ख़िज़ाँ
का
कोई
पयाम
दो
कि
निहाँ
इसी
में
फ़रार
है
कि
मिरी
बिसात
ग़ुबार
है
- Jabbar Jameel
पेड़
को
काटने
वाले
क्या
जाने
दुख
हम
गले
लग
नहीं
सकते
दीवार
से
Neeraj Neer
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पेड़
का
दुख
तो
कोई
पूछने
वाला
ही
न
था
अपनी
ही
आग
में
जलता
हुआ
साया
देखा
Jameel Malik
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ये
सोच
के
माँ
बाप
की
ख़िदमत
में
लगा
हूँ
इस
पेड़
का
साया
मिरे
बच्चों
को
मिलेगा
Munawwar Rana
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एक
पत्ता
शजर-ए-उम्र
से
लो
और
गिरा
लोग
कहते
हैं
मुबारक
हो
नया
साल
तुम्हें
Unknown
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पेड़
मुझे
हसरत
से
देखा
करते
थे
मैं
जंगल
में
पानी
लाया
करता
था
Tehzeeb Hafi
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परिंदे
लड़
ही
पड़े
जाएदाद
पर
आख़िर
शजर
पे
लिक्खा
हुआ
है
शजर
बराए-फ़रोख़्त
Afzal Khan
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शायद
किसी
बला
का
था
साया
दरख़्त
पर
चिड़ियों
ने
रात
शोर
मचाया
दरख़्त
पर
Abbas Tabish
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परिंद
क्यूँँ
मिरी
शाख़ों
से
ख़ौफ़
खाते
हैं
कि
इक
दरख़्त
हूँ
और
साया-दार
मैं
भी
हूँ
Asad Badayuni
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इसलिए
भी
इस
शजर
से
सबको
इतना
प्यार
है
दे
रहा
है
फल
अभी
ये
और
सायादार
है
ऐ
ख़ुदा
इस
ना-ख़ुदा
की
ख़ैर
हो
ये
नासमझ
ये
समझता
है
कि
इसके
हाथ
में
पतवार
है
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Vashu Pandey
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क़ल्ब-ए-हज़ी
मता-ए-जाँ
यूँँ
शाद
कीजिए
कसरत
के
साथ
आप
हमें
याद
कीजिए
दौलत
में
चाहते
हो
इज़ाफा
अगर
शजर
तो
बेकसों
यतीमों
की
इमदाद
कीजिए
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Shajar Abbas
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