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Taufique Habib
kuchh kahooñ qaum kii buraai par
kuchh kahooñ qaum kii buraai par | कुछ कहूँ क़ौम की बुराई पर
- Taufique Habib
कुछ
कहूँ
क़ौम
की
बुराई
पर
जान
जाती
है
इस
ढिठाई
पर
- Taufique Habib
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दीवार
दरिया
या
कहीं
सहरा
ना
हो
मुमकिन
नहीं
के
प्यार
पे
पहरा
ना
हो
जब
दूर
थे
ये
दर्द-ए-दिल
पैदा
हुआ
नजदीकियों
से
फिर
ये
क्यूँँ
गहरा
ना
हो
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Taufique Habib
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या
तो
ये
भी
बीमारी
है
लाइलाज
आपकी
या
फिर
इस
दवा
की
ज़रूरत
नहीं
आपको
Taufique Habib
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जब
तलक
था
यहाँ
हमारा
दिल
बस
तिरे
ख़्वाब
देखता
था
दिल
और
कुछ
दिन
यहाँ
रहूँगा
मैं
पर
रहेगा
यहीं
हमेशा
दिल
लौट
आ
इंतिज़ार
कर
लेगा
उम्र
भर
अब
तिरा
रहेगा
दिल
आरज़ू
क्या
है
तू
बता
भी
दे
जान
दे
दूँ
है
चीज़
ये
क्या
दिल
दिल
किसी
नाम
पे
धड़क
जाता
क्यूँँ
तिरे
नाम
पे
ही
धड़का
दिल
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Taufique Habib
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ये
प्यार
व्यार
छोड़ो
कुछ
काम
सीख
लो
तुम
कुछ
और
कर
ना
पाओ
कुछ
नाम
सीख
लो
तुम
Taufique Habib
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पड़
गए
इश्क़
के
ख़राबों
में
दिल
नहीं
लग
रहा
किताबों
में
आसमाँ
से
गिरे
समझ
आया
थी
ज़रूरी
ज़मीन
ख़्वाबों
में
इक
ज़माना
गुज़र
गया
पर
हम
हैं
अभी
तक
घिरे
अज़ाबों
में
थे
ज़रूरी
सवाल
हम
सारी
उम्र
उलझे
रहे
जवाबों
में
वक़्त
बीता
ख़बर
हुई
सबको
क्या
कमी
थी
हुई
हिसाबों
में
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Taufique Habib
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