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Taufique Habib
hañs pada sabhi samjhe dukh nahin use koii
hañs pada sabhi samjhe dukh nahin use koii | हँस पड़ा सभी समझे दुख नहीं उसे कोई
- Taufique Habib
हँस
पड़ा
सभी
समझे
दुख
नहीं
उसे
कोई
आँख
क्यूँ
गुलाबी
है
क्यूँ
नहीं
समझते
हैं
- Taufique Habib
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इस
बात
से
दिल
नहीं
है
अंजान
अब
आबाद
था
दिल
मिरा
है
वीरान
अब
बेजान
दिल
इश्क़
से
हो
ये
फिर
कभी
आबाद
इसका
नहीं
कुछ
इमकान
अब
बेकार
इस
काम
से
मैं
हूँ
हो
चुका
ऐ
यार
बेज़ार
कर
दो
ऐलान
अब
कोई
न
हो
पाए
दाख़िल
अब
इसलिए
दिल
पे
दिया
है
बिठा
सो
दरबान
अब
बनना
कभी
था
मुझे
ये
तो
वो
कभी
बनना
मुझे
है
ख़ुदाया
इंसान
अब
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Taufique Habib
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हर
तरफ़
कर
दी
खड़ी
दीवार
है
अब
हो
गया
मुश्किल
तिरा
दीदार
है
अब
थक
गया
हूँ
मैं
मुसलसल
इम्तिहाँ
से
इम्तिहाँ
वो
और
भी
इक
बार
है
अब
मेहनतों
का
अब
सिला
अब
हक़
मिलेगा
देखना
ये
ख़्वाब
भी
बेकार
है
अब
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Taufique Habib
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पड़
गए
इश्क़
के
ख़राबों
में
दिल
नहीं
लग
रहा
किताबों
में
आसमाँ
से
गिरे
समझ
आया
थी
ज़रूरी
ज़मीन
ख़्वाबों
में
इक
ज़माना
गुज़र
गया
पर
हम
हैं
अभी
तक
घिरे
अज़ाबों
में
थे
ज़रूरी
सवाल
हम
सारी
उम्र
उलझे
रहे
जवाबों
में
वक़्त
बीता
ख़बर
हुई
सबको
क्या
कमी
थी
हुई
हिसाबों
में
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Taufique Habib
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कैसी
जगह
है
कैसा
जहाँ
है
कोई
नज़र
भी
आता
कहाँ
है
तेरी
तरह
कोई
भी
यहाँ
तो
हमको
नगर
में
भाता
कहाँ
है
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Taufique Habib
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एक
पल
में
बिखर
जाते
हैं
लोग
क्या
एक
पल
में
सँभल
पाते
हैं
लोग
क्या
Taufique Habib
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