dar-o-deewar kii zad se nikalna chahta hooñ main | दर-ओ-दीवार की ज़द से निकलना चाहता हूँ मैं

  - Irfan Siddiqi
दर-ओ-दीवारकीज़दसेनिकलनाचाहताहूँमैं
हवा-ए-ताज़ातेरेसाथचलनाचाहताहूँमैं
वोकहतेहैंकिआज़ादीअसीरीकेबराबरहै
तोयूँँसमझोकिज़ंजीरेंबदलनाचाहताहूँमैं
नुमूकरनेकोहैमेरालहूक़ातिलकेसीनेसे
वोचश्माहूँकिपत्थरसेउबलनाचाहताहूँमैं
बुलंदपस्तदुनियाफ़ैसलाकरनेनहींदेती
किगिरनाचाहताहूँयासँभलनाचाहताहूँमैं
मोहब्बतमेंहवसकासामज़ामिलनाकहाँमुमकिन
वोसिर्फ़इकरौशनीहैजिसमेंजलनाचाहताहूँमैं
  - Irfan Siddiqi
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