apne markaz se agar door nikal jaaoge | अपने मरकज़ से अगर दूर निकल जाओगे

  - Iqbal Azeem
अपनेमरकज़सेअगरदूरनिकलजाओगे
ख़्वाबहोजाओगेअफ़्सानोंमेंढलजाओगे
अबतोचेहरोंकेख़द-ओ-ख़ालभीपहलेसेनहीं
किसकोमालूमथातुमइतनेबदलजाओगे
अपनेपरचमकाकहींरंगभुलामतदेना
सुर्ख़शो'लोंसेजोखेलोगेतोजलजाओगे
देरहेहैंतुम्हेंतोलोगरिफ़ाक़तकाफ़रेब
उनकीतारीख़पढ़ोगेतोदहलजाओगे
अपनीमिट्टीहीपेचलनेकासलीक़ासीखो
संग-ए-मरमरपेचलोगेतोफिसलजाओगे
ख़्वाब-गाहोंसेनिकलतेहुएडरतेक्यूँँहो
धूपइतनीतोनहींहैकिपिघलजाओगे
तेज़क़दमोंसेचलोऔरतसादुमसेबचो
भीड़मेंसुस्तचलोगेतोकुचलजाओगे
हम-सफ़रढूँडोरहबरकासहाराचाहो
ठोकरेंखाओगेतोख़ुदहीसँभलजाओगे
तुमहोइकज़िंदा-ए-जावेदरिवायतकेचराग़
तुमकोईशामकासूरजहोकिढलजाओगे
सुब्ह-ए-सादिक़मुझेमतलूबहैकिससेमाँगूँ
तुमतोभोलेहोचराग़ोंसेबहलजाओगे
  - Iqbal Azeem
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy