इंसानियत के नाम को रुस्वा न कीजिए

  - Iqbal Ahmad Khan Arif
इंसानियतकेनामकोरुस्वाकीजिए
मतकीजिएबुराभीगरअच्छाकीजिए
येमो'जिज़ोंकादौरनहींहैमेरेहुज़ूर
क़ातिलसेज़िंदगीकीतमन्नाकीजिए
पर्देसेख़ूबियोंकेदिखेंगीबुराइयाँ
इंसानकोक़रीबसेदेखाकीजिए
मतढालिएउसूलोंकोसाँचेमेंवक़्तके
यूँँमस्लहतकीआँचपेपिघलाकीजिए
ख़ुद्दारियोंकीमौतहैख़ुदआदमीकीमौत
दस्त-ए-तलबकोसूरत-ए-कासाकीजिए
दुनियाभूलजाएमोहब्बतकीदास्ताँ
'आरिफ़'ख़ुदाकेवास्तेऐसाकीजिए
  - Iqbal Ahmad Khan Arif
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