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Intzar Akhtar
ha
ha | हमें यक़ीन नहीं है यूँँ रोने-धोने में
- Intzar Akhtar
हमें
यक़ीन
नहीं
है
यूँँ
रोने-धोने
में
तुम्हारे
बाद
ये
दिल
हम
निकाल
फेंकेंगे
- Intzar Akhtar
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दिल
में
और
दुनिया
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
वक़्त
के
हमेशा
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
Jaun Elia
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किस
तरह
'अमानत'
न
रहूँ
ग़म
से
मैं
दिल-गीर
आँखों
में
फिरा
करती
है
उस्ताद
की
सूरत
Amanat Lakhnavi
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गले
मिलना
न
मिलना
तो
तेरी
मर्ज़ी
है
लेकिन
तेरे
चेहरे
से
लगता
है
तेरा
दिल
कर
रहा
है
Tehzeeb Hafi
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तुम्हारे
ख़त
को
जलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
ये
दिल
बाहर
निकलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
तुम्हारा
फ़ैसला
है
पास
रुकना
या
नहीं
रुकना
मेरी
क़िस्मत
बदलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
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Tanoj Dadhich
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अगर
हमारे
ही
दिल
में
ठिकाना
चाहिए
था
तो
फिर
तुझे
ज़रा
पहले
बताना
चाहिए
था
Shakeel Jamali
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जैसे
तू
हुक्म
करे
दिल
मिरा
वैसे
धड़के
ये
घड़ी
तेरे
इशारों
से
मिला
रक्खी
है
Anwar Masood
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हर
धड़कते
पत्थर
को
लोग
दिल
समझते
हैं
'उम्रें
बीत
जाती
हैं
दिल
को
दिल
बनाने
में
Bashir Badr
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उम्र
गुज़री
दवाएँ
करते
'मीर'
दर्द-ए-दिल
का
हुआ
न
चारा
हनूज़
Meer Taqi Meer
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हम
को
दिल
से
भी
निकाला
गया
फिर
शहरस
भी
हम
को
पत्थर
से
भी
मारा
गया
फिर
ज़हरस
भी
Azm Shakri
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ज़िंदगी
भर
के
लिए
दिल
पे
निशानी
पड़
जाए
बात
ऐसी
न
लिखो,
लिख
के
मिटानी
पड़
जाए
Aadil Rasheed
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इस
तरह
मैं
ने
हवस
पर
इश्क़
को
तरजीह
दी
उस
का
माथा
चूमा
भी
तो
हाथ
रख
के
चूमा
है
Intzar Akhtar
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चाँद
से
ही
बे-वफ़ाई
का
चलन
आया
है
रौशनी
सूरज
से
और
फिर
गर्दिशें
धरती
की
Intzar Akhtar
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कुछ
मोहब्बत
है
और
बाक़ी
दर्द
और
दुनिया
में
रक्खा
ही
क्या
है
Intzar Akhtar
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अब
मेरे
बाद
ऐसा
लड़का
तुम
को
फिर
न
मिलेगा
जो
दौर-ए-कंप्यूटर
में
भी
ख़ून
से
ख़त
लिखता
हो
Intzar Akhtar
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मैं
चाहूँगा
दर्द
ये
मेरे
साथ
रहे
हर
दम
तुम
पर
ही
अपनी
बेटी
का
नाम
रखूँगा
मैं
Intzar Akhtar
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