adhuri pyaas | “अधूरी प्यास”

  - Anuraag Pathak 'anuj'
“अधूरीप्यास”
आदतनहींजातीमिरी
मैंदेखताहूॅंतेरेघरकोआजभी
हैएकआदतमुझ
मेंअबभीबाक़ीसी
कुछदेरतकताहूॅंचलेजाताहूॅंफिर
सबपूछते
क्याहैभलादिलमेंतिरे
ख़ामोशआताजाताहै
क्यूँँहरदफ़ातस्वीरदेखाकरताहै
वोजाचुकीहैफिरभीयेदिलमानता
बिल्कुलनहीं
क्यूँँचैनभीपड़तानहीं
आख़िरकरूँॅंतोक्याकरूँॅं
ख़ुदसेहीबातेंकरताहूॅं
वोलम्सवोलम्हेंमुझेअबभीहैंयाद
बरसातकामौसमथाऔर
तूहाथमेराथामकेचलतीगई
बिनमुस्कुराएबातकरतेहीनहींथेहमकभी
फिरकैसामेरेवक़्तने
येखेलरचकरबे-सबब
क्यूँँग़मदिया
अबउलझाहीरहताहूॅंमैं
रेशमकीकोईडोरसा
हैएकआदतजोनहींजाएगीअब
हैइकअधूरीप्यासकुछ
आसानीसेबुझनेनहींवालीमिरी
  - Anuraag Pathak 'anuj'
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