“अधूरीप्यास”
आदतनहींजातीमिरी
मैंदेखताहूॅंतेरेघरकोआजभी
हैएकआदतमुझ
मेंअबभीबाक़ीसी
कुछदेरतकताहूॅंचलेजाताहूॅंफिर
सबपूछते
क्याहैभलादिलमेंतिरे
ख़ामोशआताजाताहै
क्यूँँहरदफ़ातस्वीरदेखाकरताहै
वोजाचुकीहैफिरभीयेदिलमानता
बिल्कुलनहीं
क्यूँँचैनभीपड़तानहीं
आख़िरकरूँॅंतोक्याकरूँॅं
ख़ुदसेहीबातेंकरताहूॅं
वोलम्सवोलम्हेंमुझेअबभीहैंयाद
बरसातकामौसमथाऔर
तूहाथमेराथामकेचलतीगई
बिनमुस्कुराएबातकरतेहीनहींथेहमकभी
फिरकैसामेरेवक़्तने
येखेलरचकरबे-सबब
क्यूँँग़मदिया
अबउलझाहीरहताहूॅंमैं
रेशमकीकोईडोरसा
हैएकआदतजोनहींजाएगीअब
हैइकअधूरीप्यासकुछ
आसानीसेबुझनेनहींवालीमिरी