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S M Afzal Imam
aañsu jo unke aankhoñ se nikal jaate hain
aañsu jo unke aankhoñ se nikal jaate hain | आँसू जो उनके आँखों से निकल जाते हैं
- S M Afzal Imam
आँसू
जो
उनके
आँखों
से
निकल
जाते
हैं
पत्थर
दिल
भी
पल
भर
में
ही
पिघल
जाते
हैं
ज़ख़्मी
होने
से
मैं
दिल
को
बचाऊँ
कैसे
वो
मुस्काते
हैं
तो
ख़ंजर
चल
जाते
हैं
- S M Afzal Imam
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पूरी
कायनात
में
एक
क़ातिल
बीमारी
की
हवा
हो
गई
वक़्त
ने
कैसा
सितम
ढाया
कि
दूरियाँ
ही
दवा
हो
गईं
Unknown
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जो
सारे
ज़ख़्म
मेरे
भर
दिया
करता
उसी
के
नाम
का
ख़ंजर
बनाया
है
Parul Singh "Noor"
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ये
बात
अभी
सबको
समझ
आई
नहीं
है
दीवाना
है
दीवाना
तमन्नाई
नहीं
है
दिल
मेरा
दुखाकर
ये
मुझे
तेरा
मनाना
मरहम
है
फ़क़त
ज़ख़्म
की
भरपाई
नहीं
है
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Vikram Gaur Vairagi
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एक
नज़र
देखते
तो
जाओ
मुझे
कब
कहा
है
गले
लगाओ
मुझे
तुमको
नुस्खा
भी
लिख
के
दे
दूँगा
ज़ख़्म
तो
ठीक
से
दिखाओ
मुझे
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Zia Mazkoor
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ये
इत्तिफ़ाक़
ज़रूरी
नहीं
दोबारा
हो
मैं
तुम
को
सोचने
बैठूँ
तो
ज़ख़्म
भर
जाएँ
Abhishek shukla
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शाख़-दर-शाख़
होती
है
ज़ख़्मी
जब
परिंदा
शिकार
होता
है
Indira Varma
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छोड़
कर
जाने
का
मंज़र
याद
है
हर
सितम
तेरा
सितमगर
याद
है
अपना
बचपन
भूल
बैठा
हूँ
मगर
अब
भी
तेरा
रोल
नंबर
याद
है
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Salman Zafar
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आज
फिर
नींद
को
आँखों
से
बिछड़ते
देखा
आज
फिर
याद
कोई
चोट
पुरानी
आई
Iqbal Ashhar
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यूँँ
बे-तरतीब
ज़ख़्मों
ने
बताया
राज़
क़ातिल
का
सलीके
से
जो
मेरा
क़त्ल
गर
होता
तो
क्या
होता
Vikram Gaur Vairagi
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किनारे
दो
मिलाने
में
हैं
कितनी
मुश्किलें
सोचो
ये
पुल
दिन
भर
ही
सीने
पे
बिचारा
चोट
खाता
है
Prashant Beybaar
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माँ
के
आँसू
को
समझता
हूँ
मुक़द्दस
इतना
बस
उन्हें
चूम
ले
अफ़ज़ल
तो
वज़ू
हो
जाए
S M Afzal Imam
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अश्क
माँ
के
जो
ख़ुशी
से
गिरे
तो
हैं
मोती
और
छलके
जो
ग़मों
से
तो
लहू
हो
जाए
S M Afzal Imam
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चाय
पीते
हुए
तेरी
आँखें
पढ़ें
और
फिर
तेरी
आँखों
पे
चर्चा
करें
S M Afzal Imam
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खु़दी
में
क्यूँ
सनम
मदहोश
रहती
हो
सुना
है
तुम
बहुत
ख़ामोश
रहती
हो
S M Afzal Imam
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तुम
से
फु़र्सत
मिले
तब
तो
सोचा
करें
क्या
नहीं
हम
करें
और
क्या
क्या
करें
है
हमारे
ख़यालों
में
दो
काम
ही
तुमको
देखा
करें
और
देखा
करें
चाय
पीते
हुए
तेरी
आँखें
पढ़ें
और
फिर
तेरी
आँखों
पे
चर्चा
करें
तू
ने
अच्छा
किया
जो
सहारा
दिया
पर
ज़रूरी
नहीं
हम
भी
अच्छा
करें
हाँ
मोहब्बत
है
दोनों
तरफ़
से
मगर
आप
को
चाहिए
हम
से
पर्दा
करें
मेरी
ख़्वाहिश
है
जब
आप
अफ़ज़ल
मिलें
फूल
हर
मर्तबा
साथ
लाया
करें
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S M Afzal Imam
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