kya jaane kis ki dhun men raha dil-figaar chaand | क्या जाने किस की धुन में रहा दिल-फ़िगार चाँद

  - Ikram Janjua
क्याजानेकिसकीधुनमेंरहादिल-फ़िगारचाँद
संगमपेरोज़-ओ-शबकेढलाबारबारचाँद
आईरातभरकोईपनघटपेसाँवली
पानीमेंछुपकेबैठारहाबे-क़रारचाँद
किरनोंकीडोरियोंसेउलझतेहोकिसलिए
कुछभीदेसकेगातुझेदाग़-दारचाँद
बाज़ूकेदाएरेवोमहकचूड़ियाँखनक
दो-साएज़र्द-चाँदनीधीमीपुकारचाँद
सूरजथावोतोशामसेपहलेहीढलगया
नीलेउफ़ुक़पेऔरभीहैंबे-शुमारचाँद
हररोज़मेरेघरमेंउतरताहैकिसलिए
मुझकोभीअपनेशहरमेंइकदिनउतारचाँद
बस्तीकेलोगजानिएक्यासोचतेरहे
बादलकीछतपेसोयारहासोगवारचाँद
अबचाँदनीकेनामसेनफ़रतसीहोगई
'इकराम'ज़िंदगीकोलगेऐसेचारचाँद
  - Ikram Janjua
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