kya ishq hai jab ho jaayega tab baat samajh men aayegi | क्या इश्क़ है जब हो जाएगा तब बात समझ में आएगी

  - Iftikhar Raghib
क्याइश्क़हैजबहोजाएगातबबातसमझमेंआएगी
जबज़ेहनकोदिलसमझाएगातबबातसमझमेंआएगी
पलमेंख़ुशपलमेंरंजीदाआएसमझमेंबातहैक्या
दिलखिलखिलकरमुरझाएगातबबातसमझमेंआएगी
गुम-सुमरहनेकाक्याहैसबबहँसताहैअकेलेमेंकोईकब
जबकोईदिलकोचुराएगातबबातसमझमेंआएगी
मैंऔरोंकोसमझाताथाइश्क़मुझेमालूमथा
जबकुछसमझमेंआएगातबबातसमझमेंआएगी
क्याआफ़तदिलकाआनाहैबे-सूदअभीसमझानाहै
दिलतड़पेगातड़पाएगातबबातसमझमेंआएगी
छुप-छुपकरदिलक्यूँरोताहैक्याआलम-ए-वहशतहोताहै
रह-रहकरजीघबराएगातबबातसमझमेंआएगी
क्याशयहैमोहब्बतकीख़ुशबूआताहैनज़रकोईक्यूँहरसू
आँखोंमेंकोईबसजाएगातबबातसमझमेंआएगी
'राग़िब'मतपूछहैरग़बतक्याइज़हारमोहब्बतक्याहैबला
इकलफ़्ज़मुँहतकआएगातबबातसमझमेंआएगी
  - Iftikhar Raghib
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