vehshat hai be-zaari hai | वहशत है बे-ज़ारी है

  - Iftikhar Haidar
वहशतहैबे-ज़ारीहै
शामभीकितनीभारीहै
बाहरइकसन्नाटाहै
अंदरआह-ओ-ज़ारीहै
लिखदेताहूँहाल-ए-दिल
कहनेमेंदुश्वारीहै
दर्दमुसीबतबेचैनी
अपनीसबसेयारीहै
सीनाचरताजाताहै
ख़्वाहिशहैयाआरीहै
मेरेदिलकेकमरेमें
यादोंकीअलमारीहै
प्रेमनगरकाहरबंदा
जज़्बोंकाब्योपारीहै
आपमोहब्बतकहतेहैं
धोकाहैमक्कारीहै
सोज़हैमेरेलफ़्ज़ोंमें
लहजेमेंसरशारीहै
शे'रनहींलिखतासाहब
पैहमअश्क-शुमारीहै
  - Iftikhar Haidar
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