KHamosh rah ke zawal-e-sukhan ka gham ki.e jaayen | ख़मोश रह के ज़वाल-ए-सुख़न का ग़म किए जाएँ

  - Idris Babar
ख़मोशरहकेज़वाल-ए-सुख़नकाग़मकिएजाएँ
सवालयेहैकियूँँकितनीदेरहमकिएजाएँ
येनक़्श-गरकेलिएसहलभीहोशायद
किहमसेऔरभीइसख़ाकपररक़मकिएजाएँ
कईगुज़िश्ताज़मानेकईशिकस्तानुजूम
जोदस्तरसमेंहैंलफ़्ज़ोंमेंकैसेज़मकिएजाएँ
येगोश्वारेज़बाँकेबहुतसँभालचुके
सौशे'रकाटदिएजाएँख़्वाबकमकिएजाएँ
तेराख़यालभीआएतोकितनीदेरतलक
कईग़ज़ालमिरेदश्त-ए-दिलमेंरमकिएजाएँ
मैंजानताहूँयेमुमकिननहींमगरदोस्त
मैंचाहताहूँकिवोख़्वाबफिरबहमकिएजाएँ
हिसाबदिलकारखेंहमकिदहरका'बाबर'
शुमारदाग़किएजाएँयादिरमकिएजाएँ
  - Idris Babar
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