mish'al-b-kaf kabhi to kabhi dil-b-dast tha | मिशअल-ब-कफ़ कभी तो कभी दिल-ब-दस्त था

  - Ibrahim Ashk
मिशअल-ब-कफ़कभीतोकभीदिल-ब-दस्तथा
मैंसैल-ए-तीरगीमेंतजल्ली-परस्तथा
हरइककमंदअरसा-ए-आफ़ाक़हीपेथी
लेकिनबुलंदजितनाहुआउतनापस्तथा
थीहौसलेकीबातज़मानेमेंज़िंदगी
क़दमोंकाफ़ासलाभीयहाँएकजस्तथा
बिखरेहुएथेलोगख़ुदअपनेवजूदमें
इंसाँकीज़िंदगीकाअजबबंदोबस्तथा
मरनेकेबादअज़्मतशोहरतसेफ़ाएदा
लेकिनजहाँतमामहीमुर्दा-परस्तथा
सरमाया-ए-हयातथेकुछनक़्द-ए-दाग़-ए-दिल
सचबाततोहैयेकिबहुततंग-दस्तथा
अर्ज़-ए-नियाज़-ए-शौक़सेथाबे-नियाज़दिल
मुल्क-ए-हवसमें'अश्क'अकेलाहीमस्तथा
  - Ibrahim Ashk
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