phir se vo laut kar nahin aaya | फिर से वो लौट कर नहीं आया

  - Ibn-e-Mufti
फिरसेवोलौटकरनहींआया
फिरदु'आमेंअसरनहींआया
चैनआएगाकैसेआजकीशब
तारेनिकले,क़मरनहींआया
लिखतेदेखाथाख़्वाबमेंउनको
अबतलकनामा-बरनहींआया
मेरेमरनेपेआयासाराजहाँ
जोथाइकबा-ख़बरनहींआया
चलबसीमाँलिएखुलीआँखें
उसका,नूर-ए-नज़रनहींआया
यूँँतोपत्थरबहुतसेदेखेहैं
कोईतुमसानज़रनहींआया
शामढलनेलगीहैअब'मुफ़्ती'
सुब्हकाभूलाघरनहींआया
  - Ibn-e-Mufti
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