log hilaal-e-shaam se badh kar pal men maah-e-tamaam hue | लोग हिलाल-ए-शाम से बढ़ कर पल में माह-ए-तमाम हुए

  - Ibn E Insha
लोगहिलाल-ए-शामसेबढ़करपलमेंमाह-ए-तमामहुए
हमहरबुर्जमेंघटतेघटतेसुब्हतलकगुमनामहुए
उनलोगोंकीबातकरोजोइश्क़मेंख़ुश-अंजामहुए
नज्दमेंक़ैसयहाँपर'इंशा'ख़ारहुएनाकामहुए
किसकाचमकताचेहरालाएँकिससूरजसेमाँगेंधूप
घूरअँधेराछाजाताहैख़ल्वत-ए-दिलमेंशामहुए
एकसेएकजुनूँकामाराइसबस्तीमेंरहताहै
एकहमींहुशियारथेयारोएकहमींबद-नामहुए
शौक़कीआगनफ़सकीगर्मीघटतेघटतेसर्दहो
चाहकीराहदिखाकरतुमतोवक़्फ़-ए-दरीचा-ओ-बामहुए
उनसेबहारबाग़कीबातेंकरकेजीकोदुखानाक्या
जिनकोएकज़मानागुज़राकुंज-ए-क़फ़समेंरामहुए
'इंशा'-साहिबपौफटतीहैतारेडूबेसुब्हहुई
बाततुम्हारीमानकेहमतोशबभरबे-आरामहुए
  - Ibn E Insha
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