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SAAGAR SINGH RAJPUT
vo gair ka haath thaa
vo gair ka haath thaa | वो ग़ैर का हाथ था
- SAAGAR SINGH RAJPUT
वो
ग़ैर
का
हाथ
था
में
खड़ा
है
ज़िंदा
हूँ
मैं
ये
मिरा
हौसला
है
दिल
को
मिलेगा
सुकूँ
यार
कैसे
दिल
और
दिलदार
में
फ़ासला
है
उसके
रहेंगे
हरे
ज़ख़्म
हर
दम
याँ
इश्क़
का
तीर
जिसको
लगा
है
वो
था
खिलाड़ी
हमेशा
से
अच्छा
दिल
से
मिरे
इस
लिए
खेलता
है
आराम
दिल
को
नहीं
अब
मिलेगा
है
दिल
किसी
का
किसी
पे
फ़िदा
है
- SAAGAR SINGH RAJPUT
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ज़रा
सा
ख़फ़ा
हूँ
मिरे
चाँद
से
मैं
ख़फ़ा
किस
लिए
हूँ
उसे
भी
पता
है
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तेरी
फोटो
निहारते
हैं
रात
ऐसे
गुज़ारते
हैं
नाम
तेरा
कभी
कभी
हम
नींद
में
भी
पुकारते
हैं
ध्यान
से
बात
सुन
मिरी
तू
कर्म
क़िस्मत
सँवारते
हैं
नाप
कर
के
ग़रीब
चादर
पाँव
अपने
पसारते
हैं
कौन
हारा
है
दुश्मनों
से
लोग
अपनों
से
हारते
हैं
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भरोसे
का
मिरे
अब
मान
रखना
तुम
मिरी
जाँ
हो
यही
पहचान
रखना
तुम
सुना
है
सर्दियाँ
हैं
माइनस
पंद्रह
सुनो
अपना
ज़ियादा
ध्यान
रखना
तुम
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मैं
बे-ईमान
नहीं
हो
सकता
मैं
पोता
हूँ
श्री
राम
लखन
का
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जिसको
मुहब्बत
से
मुहब्बत
है
नहीं
वो
शख़्स
ज़ेहनी
तौर
पे
बीमार
है
उसकी
जबीं
चूमो
उसे
तुम
प्यार
दो
बस
प्यार
ही
बीमार
का
उपचार
है
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