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Hukm
ham dono men raabta sochti hai
ham dono men raabta sochti hai | हम दोनों में राब्ता सोचती है
- Hukm
हम
दोनों
में
राब्ता
सोचती
है
दुनिया
भी
कितना
जुदा
सोचती
है
मैंने
तो
उसको
मोहब्बत
ही
दी
है
सारा
ही
कुछ
दे
चुका
सोचती
है
कब
से
दु'आओं
में
महबूब
माँगा
अब
मिल
रहा
है
तो
क्या
सोचती
है?
ज़्यादास
ज़्यादा
भी
कितना
टिकेगी
वो
सोच
जो
बस
नफ़ा
सोचती
है
जा
'हुक्म'
तेरी
मोहब्बत
पे
लानत
वो
लड़की
ख़ुद
को
फँसा
सोचती
है
- Hukm
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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इसी
होनी
को
तो
क़िस्मत
का
लिखा
कहते
हैं
जीतने
का
जहाँ
मौक़ा
था
वहीं
मात
हुई
Manzar Bhopali
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एक
हमें
आवारा
कहना
कोई
बड़ा
इल्ज़ाम
नहीं
दुनिया
वाले
दिल
वालों
को
और
बहुत
कुछ
कहते
हैं
Habib Jalib
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इस
दौर
के
मर्दों
की
जो
की
शक्ल-शुमारी
साबित
हुआ
दुनिया
में
ख़्वातीन
बहुत
हैं
Sarfaraz Shahid
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तुम्हारे
साथ
था
तो
मैं
गम-ए-उल्फ़त
में
उलझा
था
तुम्हें
छोड़ा
तो
ये
जाना
कि
दुनिया
ख़ूब-सूरत
है
Nirbhay Nishchhal
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यक़ीं
मोहकम
अमल
पैहम
मोहब्बत
फ़ातेह-ए-आलम
जिहाद-ए-ज़िंदगानी
में
हैं
ये
मर्दों
की
शमशीरें
Allama Iqbal
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अपनी
दुनिया
भी
चल
पड़े
शायद
इक
रुका
फ़ैसला
किया
जाए
Madan Mohan Danish
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नहीं
दुनिया
को
जब
परवाह
हमारी
तो
फिर
दुनिया
की
परवाह
क्यूँँ
करें
हम
Jaun Elia
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जहाँ
से
जी
न
लगे
तुम
वहीं
बिछड़
जाना
मगर
ख़ुदा
के
लिए
बे-वफ़ाई
न
करना
Munawwar Rana
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इतने
दुख
से
भरी
है
ये
दुनिया
आँख
खुलते
ही
आँख
भर
आए
shampa andaliib
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तुम्हें
तो
ख़ाक
भी
पता
नहीं
है
वो
चाहता
है
बोलता
नहीं
है
जिस
आँख
से
हो
उसको
प्यार,
उस
में
वो
ज़्यादा
देर
देखता
नहीं
है
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शे'र
सुने
या
जादू
चलता
देख
लिया
तूने
मुझ
में
ऐसा
भी
क्या
देख
लिया
फिर
से
खुल
के
हँसने
को
जी
करता
है
फिर
से
कोई
इश्क़
में
रोता
देख
लिया
मैंने
शाल
ख़रीदी
देख
के
रंगों
को
उस
पगली
ने
महंगा
सस्ता
देख
लिया
कई
बरस
तो
साथ
रहे
,
अब
कहते
हो
'हुक्म'
नहीं
है
काम
का
बंदा
देख
लिया
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पता
नहीं
भला
है
या
बुरा
है,
कर
रहा
है
वो
घर
में
जैसा
होते
देखता
है,
कर
रहा
है
क़रीब
चार
साल
बाद
आया
है
किसी
पे
हमारा
दिल
भी
काम
कर
रहा
है,
कर
रहा
है
कहा
तो
करता
था
करेगा
नाम
कुल
जहाँ
में
मुझे
लगा
था
सिर्फ़
बोलता
है,
कर
रहा
है
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मैं
तेरे
सदक़े
जो
सिर्फ़
मुझको
ही
देखती
है
तू
रुख़
घुमा
ले
कि
सब
तुझे
देखते
मिलेंगे
Hukm
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ऐसा
नहीं
है
ये
दिल
पहला
टूटा
है
लेकिन
अबकी
बार
ज़ियादा
टूटा
है
मैं
इस
टूटे
तारे
से
क्या
माँगूँगा
ये
बेचारा
पहले
कितना
टूटा
है
उस
लड़की
की
शादी
हुई
ज़बरदस्ती
खुला
नहीं
है
दिल
का
ताला
टूटा
है
बिना
बनी
चीज़ें
भी
टूटा
करती
हैं
उसको
पूछो
जिसका
सपना
टूटा
है
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