har qadam par nit-naye saanche men dhal jaate hain log | हर क़दम पर नित-नए साँचे में ढल जाते हैं लोग

  - Himayat Ali Shayar
हरक़दमपरनित-नएसाँचेमेंढलजातेहैंलोग
देखतेहीदेखतेकितनेबदलजातेहैंलोग
किसलिएकीजेकिसीगुम-गश्ताजन्नतकीतलाश
जबकिमिट्टीकेखिलौनोंसेबहलजातेहैंलोग
कितनेसादादिलहैंअबभीसुनकेआवाज़-ए-जरस
पेशपससेबे-ख़बरघरसेनिकलजातेहैंलोग
अपनेसाएसाएसर-नहुड़ाएआहिस्ताख़िराम
जानेकिसमंज़िलकीजानिबआजकलजातेहैंलोग
शम्अकेमानिंदअहल-ए-अंजुमनसेबे-नियाज़
अक्सरअपनीआगमेंचुपचापजलजातेहैंलोग
'शाइर'उनकीदोस्तीकाअबभीदमभरतेहैंआप
ठोकरेंखाकरतोसुनतेहैंसँभलजातेहैंलोग
  - Himayat Ali Shayar
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