ye na socho faqat bhul | ये न सोचो फ़क़त भुलाना है

  - Dhirendra Pratap Singh
येसोचोफ़क़तभुलानाहै
दिलकहींऔरभीलगानाहै
एकबच्चेसेपूछापढ़तेहो
डरकेबोलानहींकमानाहै
अव्वलआनाबहुतज़रूरीहै
आइनेसेनज़रमिलानाहै
घरकेलोगोंनेसपनेदेखेहैं
हमेंग़ज़लोंमेंसरखपानाहै
उसकेदिलमेंबनानाहैमुझेघर
मछलीकीआँखहीनिशानाहै
मुझ
मेंपोशीदाबच्चाकहताहैरोज़
बातकरनीहैमुस्कुरानाहै
आजइसछोरपरतोकलउसपार
इनसफ़ीनोंकाक्याठिकानाहै
इकग़ज़लजोलिखीनहींअबतक
आजमहफ़िलमेंवोसुनानाहै
देखकरबेरखानामेरेराम
एकशबरीकोजूठाखानाहै
  - Dhirendra Pratap Singh
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