जब बिछड़ना तय हुआ है तुम समझते क्यूँ नहीं

  - Hassam Tajub
जबबिछड़नातयहुआहैतुमसमझतेक्यूँनहीं
वक़्तकायेफ़ैसलाहैतुमसमझतेक्यूँनहीं
आजभीउम्मीदपालेफिररहेहोदर-ब-दर
जानेवालाजाचुकाहैतुमसमझतेक्यूँनहीं
नफ़रतोंवालीसियासतकबतलकरहबरों
मुल्कपीछेजारहाहैतुमसमझतेक्यूँनहीं
अबतोदरियाकेतजावुज़कोख़ुदायारोकदो
घरहमाराजारहाहैतुमसमझतेक्यूँनहीं
बाज़जाओसँभालोघरकीज़िम्मेदारियाँ
बापबूढ़ाहोचुकाहैतुमसमझतेक्यूँनहीं
जल्दजाओवगरनाहमजुदाहोजाएँगे
आख़िरीफेराबचाहैतुमसमझतेक्यूँनहीं
हरकिसीकीबंदगी'हस्साम'येतोशिर्कहै
अपनामालिकबसख़ुदाहैतुमसमझतेक्यूँनहीं
  - Hassam Tajub
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy