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Hasrat Jaipuri
ye kaun aa gaii dil-ruba mahki mahki
ye kaun aa gaii dil-ruba mahki mahki | ये कौन आ गई दिल-रुबा महकी महकी
- Hasrat Jaipuri
ये
कौन
आ
गई
दिल-रुबा
महकी
महकी
फ़ज़ा
महकी
महकी
हवा
महकी
महकी
वो
आँखों
में
काजल
वो
बालों
में
गजरा
हथेली
पे
उस
के
हिना
महकी
महकी
ख़ुदा
जाने
किस
किस
की
ये
जान
लेगी
वो
क़ातिल
अदा
वो
क़ज़ा
महकी
महकी
सवेरे
सवेरे
मिरे
घर
पे
आई
ऐ
'हसरत'
वो
बाद-ए-सबा
महकी
महकी
- Hasrat Jaipuri
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लो
हमारा
जवाब
ले
जाओ
ये
महकता
गुलाब
ले
जाओ
Aleena Itrat
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है
समझना
आपको
तो
शे'र
से
इज़हार
समझें
बात
कहने
को
भला
हम
फूल
क्यूँ
तोड़ा
करेंगे
Ankit Maurya
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लहजा
कि
जैसे
सुब्ह
की
ख़ुश्बू
अज़ान
दे
जी
चाहता
है
मैं
तिरी
आवाज़
चूम
लूँ
Bashir Badr
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ये
जिस्म
तंग
है
सीने
में
भी
लहू
कम
है
दिल
अब
वो
फूल
है
जिस
में
कि
रंग-ओ-बू
कम
है
Pallav Mishra
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सूख
जाता
जल्द
है
फिर
भी
निशानी
के
लिए
फूल
इक
छुप
के
किताबों
में
छिपाना
इश्क़
है
Parul Singh "Noor"
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मिरे
ही
वास्ते
लाया
है
दोनो
फूल
और
ख़ंजर
मुझे
ये
देखना
है
बस
वो
पहले
क्या
उठाता
है
Parul Singh "Noor"
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कहाँ
चराग़
जलाएँ
कहाँ
गुलाब
रखें
छतें
तो
मिलती
हैं
लेकिन
मकाँ
नहीं
मिलता
Nida Fazli
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वो
गुल-फ़रोश
कहाँ
अब
गुलाब
किस
से
लूँ
नहीं
रहा
मिरा
साक़ी
शराब
किस
से
लूँ
Anwar Shaoor
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फिर
नज़र
में
फूल
महके
दिल
में
फिर
शमएँ
जलीं
फिर
तसव्वुर
ने
लिया
उस
बज़्म
में
जाने
का
नाम
Faiz Ahmad Faiz
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काँटों
में
घिरे
फूल
को
चूम
आएगी
लेकिन
तितली
के
परों
को
कभी
छिलते
नहीं
देखा
Parveen Shakir
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किस
वास्ते
लिक्खा
है
हथेली
पे
मिरा
नाम
मैं
हर्फ़-ए-ग़लत
हूँ
तो
मिटा
क्यूँँ
नहीं
देते
Hasrat Jaipuri
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जब
प्यार
नहीं
है
तो
भुला
क्यूँँ
नहीं
देते
ख़त
किस
लिए
रक्खे
हैं
जला
क्यूँँ
नहीं
देते
Hasrat Jaipuri
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वो
अपने
चेहरे
में
सौ
आफ़ताब
रखते
हैं
इसीलिए
तो
वो
रुख़
पे
नक़ाब
रखते
हैं
Hasrat Jaipuri
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हम
रातों
को
उठ
उठ
के
जिन
के
लिए
रोते
हैं
वो
ग़ैर
की
बाँहों
में
आराम
से
सोते
हैं
हम
अश्क
जुदाई
के
गिरने
ही
नहीं
देते
बेचैन
सी
पलकों
में
मोती
से
पिरोते
हैं
होता
चला
आया
है
बे-दर्द
ज़माने
में
सच्चाई
की
राहों
में
काँटे
सभी
बोते
हैं
अंदाज़-ए-सितम
उन
का
देखे
तो
कोई
'हसरत'
मिलने
को
तो
मिलते
हैं
नश्तर
से
चुभोते
हैं
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Hasrat Jaipuri
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ख़ुदा
जाने
किस
किस
की
ये
जान
लेगी
वो
क़ातिल
अदा
वो
क़ज़ा
महकी
महकी
Hasrat Jaipuri
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