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Harshwardhan Aurangabadi
vasl ki aakhiri vo ghadi yaad hai
vasl ki aakhiri vo ghadi yaad hai | वस्ल की आख़िरी वो घड़ी याद है
- Harshwardhan Aurangabadi
वस्ल
की
आख़िरी
वो
घड़ी
याद
है
वो
जहाँ
रू-ब-रू
थी
गली
याद
है
जो
ख़फ़ा
हो
के
जाती
रक़ीबों
तलक
मुझको
वो
सरफिरी
मनचली
याद
है
- Harshwardhan Aurangabadi
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वस्ल
हो
जाए
यहीं
हश्र
में
क्या
रक्खा
है
आज
की
बात
को
क्यूँँ
कल
पे
उठा
रक्खा
है
Ameer Minai
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इक
ओर
तेरा
ख़्वाब
जो
हर
रात
आता
है
दूजा
वो
अपना
वस्ल
जो
हो
ही
नहीं
रहा
Aqib khan
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इस
क़दर
था
खटमलों
का
चारपाई
में
हुजूम
वस्ल
का
दिल
से
मिरे
अरमान
रुख़्सत
हो
गया
Akbar Allahabadi
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तू
दिल
पे
बोझ
ले
के
मुलाक़ात
को
न
आ
मिलना
है
इस
तरह
तो
बिछड़ना
क़ुबूल
है
Unknown
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मुझ
से
मिलना
तो
ऐसे
मिलना
तू
मिले
है
गुल
को
जैसे
रंग-ओ-बू
Chandan Sharma
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मैं
अपनी
मौत
से
ख़ल्वत
में
मिलना
चाहता
हूँ
सो
मेरी
नाव
में
बस
मैं
हूँ
नाख़ुदा
नहीं
है
Pallav Mishra
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वस्ल
का
दिन
और
इतना
मुख़्तसर
दिन
गिने
जाते
थे
इस
दिन
के
लिए
Ameer Minai
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नाप
रहा
था
एक
उदासी
की
गहराई
हाथ
पकड़कर
वापस
लायी
है
तन्हाई
वस्ल
दिनों
को
काफ़ी
छोटा
कर
देता
है
हिज्र
बढ़ा
देता
है
रातों
की
लम्बाई
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Tanoj Dadhich
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वो
करेंगे
वस्ल
का
वा'दा
वफ़ा
रंग
गहरे
हैं
हमारी
शाम
के
Muztar Khairabadi
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वो
रस्मन
पूछ
लेती
है
कि
मिलना
या
नहीं
मिलना
फिर
इसके
बाद
तो
मिलना
किसे
अच्छा
नहीं
लगता
Krishnakant Kabk
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मोहब्बत
का
वो
वा'दा,
नइँ
करूँँगा
मैं
क़सम
खाई
है,
झगड़ा
नइँ
करूँँगा
मैं
मेरी
बातों
से
तुमको
दर्द
होता
है?
हटाओ,
अब
से
बोला
नइँ
करूँगा
मैं
मेरी
आदत
है
अक्सर
भूल
जाता
हूँ
तू
धड़कन
है
ये
भूला
नइँ
करूँँगा
मैं
तड़पता
था
मैं
अक्सर
तेरे
जाने
से
तू
जा,
कि
अब
से
तड़पा
नइँ
करूँँगा
मैं
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Harshwardhan Aurangabadi
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बचाओ-बचाओ
वो
चिल्ला
रही
थी
बिछड़कर
जो
मुझ
सेे,
मरे
जा
रही
थी
ग़ज़ल
गर
मैं
कहता
वो
बदनाम
होती
क़लम
से
मेरी
वो
डरे
जा
रही
थी
क़सम
तोड़-के
घर
गई
थी
जो
लड़की
वो
शादी
में
अपने
क़सम
खा
रही
थी
मुझे
जब
दवा
की
ज़रूरत
थी
यारों
नमक
दे
के
मुझको
वो
तड़पा
रही
थी
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Harshwardhan Aurangabadi
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अगर
सब
कहेंगे
यूँंँ
हिज़रत
पे
गज़लें
कहाँँ
फिर
मिलेगी
मोहब्बत
पे
गज़लें
मोहब्बत
मोहब्बत
मैं
गाता
रहूँँगा
अगर
तुम
सुनाओगे
नफ़रत
पे
गज़लें
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Harshwardhan Aurangabadi
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मेरे
दिल
से
दिल
लगाओ
तो
कहूँ
प्यार
दिल
में
भर
के
लाओ
तो
कहूँ
सब
हक़ीक़त
मैं
बताऊँगा
तुम्हें
सच
अगर
तुम
झेल
पाओ
तो
कहूँ
तुम
सेे
दिल
की
बात
कहनी
है
मुझे
तुम
अगर
बाहों
में
आओ
तो
कहूँँ
बात
वहशत
की
छुपा
लेते
हैं
सब
बात
शोहरत
की
छुपाओ
तो
कहूँँ
जो
दिखाया
था
कभी
सपना
मुझे
मेरे
वो
सपने
सजाओ
तो
कहूँँ
दिल
से
दिल
तो
सब
लगाते
हैं
यहाँँ
ज़ख़्म
से
तुम
दिल
लगाओ
तो
कहूँँ
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Harshwardhan Aurangabadi
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ग़मों
के
बाद
होंठों
पर
मुझे
मुस्कान
रखना
है
हथेली
पर
हमें
दुश्मन
से
आगे
जान
रखना
है
अगर
मैं
ना
रहा
तो
तुम
भी
सरहद
को
चले
जाना
तिरंगे
से
लिपट
आएँ
यही
अरमान
रखना
है
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Harshwardhan Aurangabadi
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