ik ajab sii paarsaai aankh men hai | इक अजब सी पारसाई आँख में है

  - harshit karnatak
इकअजबसीपारसाईआँखमेंहै
बे-वफ़ाहैपरवफ़ाईआँखमेंहै
मिलतेथेतोरहतेथेजन्नतमेंदोनों
बिछड़ेहैंतोभीख़ुदाईआँखमेंहै
उसकेग़मकाएकटुकड़ाबहचुकाहै
औरबाकीदोतिहाईआँखमेंहै
मैंयक़ींकैसेकरूँँतुझपरकिअबभी
इंतिहा-ए-बेवफ़ाईआँखमेंहै
मुझकोआताहीनहींबातेंछिपाना
राज़भीमेरापराईआँखमेंहै
कैनवसकारंगफीकाहोचुकाअब
आख़िरीहीलब-कुशाईआँखमेंहै
ठीकथादुनियासेजबतकअजनबीथे
अबतोइसकीबद-नुमाईआँखमेंहै
कोईतोलेताछिपाअपनासमझकर
क्यूँँसभीकीबे-अदाईआँखमेंहै
क्यायेख़त्त-ओ-ख़ालमेरीचाहसेथे
क्याकरूँँगरकर्बलाईआँखमेंहै
ज़ोरहैआवाज़मेंजोइसलिएहै
हादिसेकीपाबजाईआँखमेंहै
बाँटतेहैंहरकिसीकोदेखकरबस
नफ़रतोंकीरौशनाईआँखमेंहै
अबतो'हर्षित'तूउसेआवाज़देदे
कुछपलोंकीआशनाईआँखमेंहै
  - harshit karnatak
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