bas ik tumhaare lautne ke e'tibaar men | बस इक तुम्हारे लौटने के ए'तिबार में

  - Harsh saxena
बसइकतुम्हारेलौटनेकेए'तिबारमें
हमनेजवानीज़ाया'कीहैइंतिज़ारमें
टूटाहूँबे-हिसाबमगरइतनाजानलो
दाख़िलहोगादूजाकोईइसदरारमें
मैंवोजिसेछलाहैज़मानेनेहरक़दम
कैसेयक़ीनकरलूँतिराएकबारमें
क्याकीजिएजोहारगयादिलमैंख़ारपर
यूँँतोबहुतसेफूलखिलेथेबहारमें
पहलूमेंउसकेबैठकेये'इल्महोगया
पत्थरकोकैसेमोमबनातेहैंप्यारमें
उनकीयूँँबढ़तीबे-रुख़ीसेयेसुकूनहै
कुछतोइज़ाफ़ाहोरहामेरीपगारमें
महफ़िलमें‘हर्ष’उनकीतवज्जोहकोछोड़कर
कुछभीमुनाफ़ाहैनहींइसरोज़गारमें
  - Harsh saxena
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