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Hameed Sarwar Bahraichi
hazaaron baar apni bebaasi par ro chuke hain ham
hazaaron baar apni bebaasi par ro chuke hain ham | हज़ारों बार अपनी बेबसी पर रो चुके हैं हम
- Hameed Sarwar Bahraichi
हज़ारों
बार
अपनी
बेबसी
पर
रो
चुके
हैं
हम
मगर
फिर
भी
हमारी
ज़िद
है
कश्ती
पार
करने
की
- Hameed Sarwar Bahraichi
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दर्द
में
शिद्दत-ए-एहसास
नहीं
थी
पहले
ज़िंदगी
राम
का
बन-बास
नहीं
थी
पहले
Shakeel Azmi
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मैं
पा
सका
न
कभी
इस
ख़लिश
से
छुटकारा
वो
मुझ
से
जीत
भी
सकता
था
जाने
क्यूँँ
हारा
Javed Akhtar
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दिल
की
तमन्ना
थी
मस्ती
में
मंज़िल
से
भी
दूर
निकलते
अपना
भी
कोई
साथी
होता
हम
भी
बहकते
चलते
चलते
Majrooh Sultanpuri
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मंज़िलें
क्या
हैं,
रास्ता
क्या
है
हौसला
हो
तो
फ़ासला
क्या
है
Aalok Shrivastav
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नहीं
निगाह
में
मंज़िल,
तो
जुस्तजू
ही
सही
नहीं
विसाल
मुयस्सर
तो
आरज़ू
ही
सही
Faiz Ahmad Faiz
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धूप
को
साया
ज़मीं
को
आसमाँ
करती
है
माँ
हाथ
रखकर
मेरे
सर
पर
सायबाँ
करती
है
माँ
मेरी
ख़्वाहिश
और
मेरी
ज़िद
उसके
क़दमों
पर
निसार
हाँ
की
गुंज़ाइश
न
हो
तो
फिर
भी
हाँ
करती
है
माँ
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Nawaz Deobandi
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ज़िद
हर
इक
बात
पर
नहीं
अच्छी
दोस्त
की
दोस्त
मान
लेते
हैं
Dagh Dehlvi
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पा
ए
उम्मीद
प
रक्खे
हुए
सर
हैं
हम
लोग
हैं
न
होने
के
बराबर
ही
मगर
हैं
हम
लोग
तू
ने
बरता
ही
नहीं
ठीक
से
हम
को
ऐ
दोस्त
ऐब
लगते
हैं
ब-ज़ाहिर
प
हुनर
हैं
हम
लोग
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Abhishek shukla
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हिम्मत,
ताकत,
प्यार,
भरोसा
जो
है
सब
इनसे
ही
है
कुछ
नंबर
हैं
जिन
पर
मैंने
अक्सर
फोन
लगाया
है
Pratap Somvanshi
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मुझे
दुश्मन
से
भी
ख़ुद्दारी
की
उम्मीद
रहती
है
किसी
का
भी
हो
सर
क़दमों
में
सर
अच्छा
नहीं
लगता
Javed Akhtar
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जहाँ
ये
ख़ाक
हुआ
जाता
है
रक़ाबत
से
हर
एक
शख़्स
जो
मिलने
लगा
मुहब्बत
से
Hameed Sarwar Bahraichi
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चीख़
निकलेगी
आह
निकलेगी
अब
तो
ये
बेपनाह
निकलेगी
Hameed Sarwar Bahraichi
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हम
तो
रोते
रहे,
गिड़गिड़ाते
रहे
क्या
सितम
हम
सेे
वो
दूर
जाते
रहे
मेरी
आँखें
थीं
नम
जैसे
सैलाब
हो
फिर
भी
अपना
लहू
हम
बहाते
रहे
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Hameed Sarwar Bahraichi
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हर
एक
लफ़्ज़
में
जादू
है
तेरी
निस्बत
से
यही
वजह
है
तुझे
चाहते
हैं
शिद्दत
से
Hameed Sarwar Bahraichi
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गर
वही
होता
है
जो
कुछ
भी
लिखा
होता
है
फिर
तो
मंज़ूर
मिरे
पाँव
के
छाले
मुझको
Hameed Sarwar Bahraichi
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