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Hameed Sarwar Bahraichi
ik nishaani pal rahi hai pyaar ki
ik nishaani pal rahi hai pyaar ki | इक निशानी पल रही है प्यार की
- Hameed Sarwar Bahraichi
इक
निशानी
पल
रही
है
प्यार
की
और
क्या
ख़्वाहिश
करूँँ
संसार
की
- Hameed Sarwar Bahraichi
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निगाहें
फेर
ली
घबरा
के
मैंने
वो
तुम
से
ख़ूब-सूरत
लग
रही
थी
Fahmi Badayuni
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इश्क़
अगर
बढ़ता
है
तो
फिर
झगड़े
भी
तो
बढ़ते
हैं
आमदनी
जब
बढ़ती
है
तो
ख़र्चे
भी
तो
बढ़ते
हैं
माना
मंज़िल
नहीं
मिली
है
हमको
लेकिन
रोज़ाना
एक
क़दम
उसकी
जानिब
हम
आगे
भी
तो
बढ़ते
हैं
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Tanoj Dadhich
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बहुत
क़रीब
रही
है
ये
ज़िन्दगी
हम
से
बहुत
अज़ीज़
सही
ए'तिबार
कुछ
भी
नहीं
Akhtar Saeed Khan
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उसे
पागल
बनाती
फिर
रही
हो
जिसे
शौहर
बनाना
चाहिए
था
Arvind Inaayat
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मैं
सोचता
हूँ
जब
कभी
आओगी
सामने
किस
मुँह
से
कह
सकूँगा
मोहब्बत
नहीं
रही
Shoonya
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जब
भी
कोई
मंज़िल
हासिल
करता
हूँ
याद
बहुत
आती
हैं
तेरी
ता'रीफ़ें
Tanoj Dadhich
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सुखाई
जा
रही
है
जुल्फ़
धोकर
घटा
या'नी
निचोड़ी
जा
रही
है
Satya Prakash Soni
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प्यार
करने
की
हिम्मत
नहीं
उनके
पास
और
हम
सेे
किनारा
भी
होता
नहीं
बात
सीधे
कही
भी
नहीं
जा
रही
और
कोई
इशारा
भी
होता
नहीं
उसको
उम्मीद
है
ऐश
होगी
बसर
साथ
में
जब
रहेगी
मिरे
वो
मगर
मुझपे
जितनी
मुहब्बत
बची
है
सखी
इतने
में
तो
गुज़ारा
भी
होता
नहीं
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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बंद
कमरा,
सर
पे
पंखा,
तीरगी
है
और
मैं
एक
लड़ाई
चल
रही
है
ज़िंदगी
है
औऱ
मैं
Shadab Asghar
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नहीं
निगाह
में
मंज़िल
तो
जुस्तुजू
ही
सही
नहीं
विसाल
मुयस्सर
तो
आरज़ू
ही
सही
Faiz Ahmad Faiz
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हम
मुनाफ़िक़
की
किसी
बात
में
आएँगे
नहीं
चाहे
तन्हा
रहें
जज़्बात
में
आएँगे
नहीं
ज़र्फ़
वाले
हैं
मुहब्बत
है
हमारा
पेशा
यानी
कुछ
भी
हो
ख़ुराफ़ात
में
आएँगे
नहीं
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Hameed Sarwar Bahraichi
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कमाल
ये
नहीं
उसको
भुला
चुका
हूँ
मैं
कमाल
ये
है
बहुत
दूर
जा
चुका
हूँ
मैं
Hameed Sarwar Bahraichi
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हुस्न
की
दस्तरस
में
थे
हम
भी
कभी
हुस्न
ढलता
गया
हम
निकलते
गए
मोम
जैसे
थे
हम,
आग
जैसी
थी
वो
वो
सुलगती
गई
हम
पिघलते
गए
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Hameed Sarwar Bahraichi
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जहाँ
ये
ख़ाक
हुआ
जाता
है
रक़ाबत
से
हर
एक
शख़्स
जो
मिलने
लगा
मुहब्बत
से
Hameed Sarwar Bahraichi
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हज़ारों
ख़्वाब
हैं
आँखों
में
पिन्हा
मगर
फिर
भी
वो
सपने
देखता
है
Hameed Sarwar Bahraichi
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