mukhlis rahe sakhi bhi rahe motabar rahe | मुख़लिस रहे सख़ी भी रहे मोतबर रहे

  - Hameed Sarwar Bahraichi
मुख़लिसरहेसख़ीभीरहेमोतबररहे
हरशख़्सकीनज़रमेंमगरमुख़्तसररहे
उसनेबसएकबारमेंदीवानाकरदिया
हमलाखकोशिशोंकेइवज़बेअसररहे
येऐ़नशीनक़ाफ़मैंमानूॅंगातबमियाॅं
कोईकिसीकीयादमेंजबउम्र-भररहे
अबमतबताओइश्क़मेंकितनेहैंफ़ाएदे
सदियाँगुज़रगईंहैंअभीज़ख़्मभररहे
सरवरसुख़नवरीमेंवहीकामयाबहै
जोशख़्सशा'इरीमेंसदापुरअसररहे
  - Hameed Sarwar Bahraichi
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