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Haidar Bayabani
saalgirah khargosh manaae
saalgirah khargosh manaae | सालगिरह ख़रगोश मनाए
- Haidar Bayabani
सालगिरह
ख़रगोश
मनाए
जंगल
के
सब
साथी
आए
भीड़
लगी
है
मेहमानों
की
कुछ
अपनों
कुछ
बेगानों
की
शे'र
दहाड़ें
मारता
आए
हाथी
भी
चिंघाड़ता
आए
कुत्ता
भौं
भौं
करता
आया
सांभर
चौकड़ी
भरता
आया
गाय
जब
रम्भाती
आई
बकरी
कुछ
शरमाती
आई
नाचता
गाता
आया
भालू
डोलता
आया
मेंढा
कालू
घोड़ा
सरपट
दौड़ा
आया
भैंसों
का
इक
जोड़ा
आया
हिरनी
आई
लोमड़ी
आई
बिल्ली
अपने
बच्चे
लाई
साथ
में
सब
ही
लाए
तोहफ़े
सब
ख़रगोश
ने
पाए
तोहफ़े
फूलों
का
गुलदस्ता
ले
कर
चीं
चीं
करता
आया
बंदर
केक
बना
के
लाया
चीता
उस
ने
दिल
ख़रगोश
का
जीता
केक
कटा
तो
सारे
ख़ुश
थे
केक
बटा
तो
सारे
ख़ुश
थे
इक
दूजे
से
गले
मिले
सब
भूल
के
शिकवे
और
गिले
सब
बंदर
नाचे
भालू
गाए
कालू
मेंढा
ढोल
बजाए
सालगिरह
का
जश्न
बपा
है
जंगल
जंगल
शोर
हुआ
है
- Haidar Bayabani
हम
को
किस
के
ग़म
ने
मारा
ये
कहानी
फिर
सही
किस
ने
तोड़ा
दिल
हमारा
ये
कहानी
फिर
सही
Masroor Anwar
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दिल
गया
रौनक़-ए-हयात
गई
ग़म
गया
सारी
काएनात
गई
Jigar Moradabadi
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हम
मिल
के
आ
गए
मगर
अच्छा
नहीं
लगा
फिर
यूँँ
हुआ
असर
कि
घर
अच्छा
नहीं
लगा
इक
बार
दिल
में
तुझ
सेे
जुदाई
का
डर
बना
फिर
दूसरा
कोई
भी
डर
अच्छा
नहीं
लगा
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Shriyansh Qaabiz
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उस
के
दिल
की
आग
ठंडी
पड़
गई
मुझ
को
शोहरत
मिल
गई
इल्ज़ाम
से
Siraj Faisal Khan
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हम
तो
बचपन
में
भी
अकेले
थे
सिर्फ़
दिल
की
गली
में
खेले
थे
Javed Akhtar
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शाम-ए-फ़िराक़
अब
न
पूछ
आई
और
आ
के
टल
गई
दिल
था
कि
फिर
बहल
गया
जाँ
थी
कि
फिर
सँभल
गई
Faiz Ahmad Faiz
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हम
लबों
से
कह
न
पाए
उन
से
हाल-ए-दिल
कभी
और
वो
समझे
नहीं
ये
ख़ामुशी
क्या
चीज़
है
Nida Fazli
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ये
कहते
हो
तिरे
जाने
से
दिल
को
चैन
आएगा
तो
जाता
हूँ,
ख़ुदा
हाफ़िज़!
मगर
तुम
झूठ
कहते
हो
Zubair Ali Tabish
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हर
दुख
का
है
इलाज,
उसे
देखते
रहो
सबकुछ
भुला
के
आज
उसे
देखते
रहो
देखा
उसे
तो
दिल
ने
ये
बे-साख़्ता
कहा
छोड़ो
ये
काम
काज
उसे
देखते
रहो
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Aslam Rashid
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वही
शागिर्द
फिर
हो
जाते
हैं
उस्ताद
ऐ
'जौहर'
जो
अपने
जान-ओ-दिल
से
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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