na ye zameen hai apni na aasmaañ apna | न ये ज़मीन है अपनी न आसमाँ अपना

  - Hafizullah Khan Badr
येज़मीनहैअपनीआसमाँअपना
अलगबनाएँहमअपनेलिएजहाँअपना
ख़याल-ए-शिकवा-ए-ज़िंदाँकिसेबाद-ए-चमन
नहींबहारसेकममौसम-ए-ख़िज़ाँअपना
चमनकालुत्फ़हीक्याजबकिबाल-ओ-पररहे
बनालियाहैक़फ़सहीकोआशियाँअपना
हैंसख़्त-जानहमउनकीकलाइयाँनाज़ुक
येइम्तिहानहैउनकाकिइम्तिहानअपना
हैज़िंदगीभीयहीलुत्फ़-ए-ज़िंदगीभीयही
ख़ुदाकरेकिहोख़त्मइम्तिहानअपना
  - Hafizullah Khan Badr
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