bazm-e-takallufaat sajaane men rah gaya | बज़्म-ए-तकल्लुफ़ात सजाने में रह गया

  - Hafeez Merathi
बज़्म-ए-तकल्लुफ़ातसजानेमेंरहगया
मैंज़िंदगीकेनाज़उठानेमेंरहगया
तासीरकेलिएजहाँतहरीफ़कीगई
इकझोलबसवहींपेफ़सानेमेंरहगया
सबमुझपेमोहर-ए-जुर्मलगातेचलेगए
मैंसबकोअपनेज़ख़्मदिखानेमेंरहगया
ख़ुदहादसाभीमौतपेउसकीथादम-ब-ख़ुद
वोदूसरोंकीजानबचानेमेंरहगया
अबअहल-ए-कारवाँपेलगाताहैतोहमतें
वोहम-सफ़रजोहीलेबहानेमेंरहगया
मैदान-ए-कार-ज़ारमेंआएवोक़ौमक्या
जिसकाजवानआईना-ख़ानेमेंरहगया
वोवक़्तकाजहाज़थाकरतालिहाज़क्या
मैंदोस्तोंसेहाथमिलानेमेंरहगया
सुनतानहींहैमुफ़्तजहाँबातभीकोई
मैंख़ालीहाथऐसेज़मानेमेंरहगया
बाज़ार-ए-ज़िंदगीसेक़ज़ालेगईमुझे
येदौरमेरेदामलगानेमेंरहगया
येभीहैएककार-ए-नुमायाँ'हफ़ीज़'का
क्यासादा-लौहकैसेज़मानेमेंरहगया
  - Hafeez Merathi
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