KHvaahish se jab rang utarne lagte hain | ख़्वाहिश से जब रंग उतरने लगते हैं

  - Hafeez Jauhar
ख़्वाहिशसेजबरंगउतरनेलगतेहैं
मौसमअपनेअंदरमरनेलगतेहैं
इकबादलकोदेखकेदश्तकीआँखोंमें
सैराबीकेख़्वाबसँवरनेलगतेहैं
जबदरियाकीचालसमझमेंआतीहै
लोगकिनारोंपरभीडरनेलगतेहैं
दिनकटताहैसूरजकीहमराहीमें
शबकोदिलकेदाग़भीजलनेलगतेहैं
उसकाफ़ोननहींमिलतातोअक्सरहम
अपनेआपसेबातेंकरनेलगतेहैं
  - Hafeez Jauhar
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