har qadam par ham samjhte the ki manzil aa gaii | हर क़दम पर हम समझते थे कि मंज़िल आ गई

  - Hafeez Hoshiarpuri
हरक़दमपरहमसमझतेथेकिमंज़िलगई
हरक़दमपरइकनईदरपेशमुश्किलगई
याख़लापरहुक्मराँयाख़ाककेअंदरनिहाँ
ज़िंदगीडटकरअनासिरकेमुक़ाबिलगई
बढ़रहाहैदम-ब-दमसुब्ह-ए-हक़ीक़तकायक़ीं
हरनफ़सपरयेगुमाँहोताहैमंज़िलगई
टूटतेजातेहैंरिश्तेजोड़ताजाताहूँमैं
एकमुश्किलकमहुईऔरएकमुश्किलगई
हाल-ए-दिलहैकोईख़्वाब-आवरफ़सानातोनहीं
नींदअभीसेतुमकोयारान-ए-महफ़िलगई
  - Hafeez Hoshiarpuri
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