ye aur baat ki lahjaa udaas rakhte hain | ये और बात कि लहजा उदास रखते हैं

  - Hafeez Banarasi
येऔरबातकिलहजाउदासरखतेहैं
ख़िज़ाँकेगीतभीअपनीमिठासरखतेहैं
कहेंतोक्याकहेंहमउनकीसादा-लौहीको
जोक़ातिलोंसेतरह्हुमकीआसरखतेहैं
किसीकेसामनेफैलाईंकिसलिएदामन
तुम्हारेदर्दकीदौलतजोपासरखतेहैं
उन्हेंहयातकीतोहमतदोअबसयारो
जोअपनाजिस्मअपनालिबासरखतेहैं
क़रीब-ए-गुल-बदनाँरहचुकेहैंदीवाने
येख़ारवोहैंजोफूलोंकीबासरखतेहैं
कहाँभिगोएकोईअपनेख़ुश्कहोंटोंको
येदौरवोहैकिदरियाभीप्यासरखतेहैं
ख़ुदाकाशुक्रअदाकीजेख़ुश-नसीबीपर
'हफ़ीज़'आपदिल-ए-ग़म-शनासरखतेहैं
  - Hafeez Banarasi
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