muddat ki tishnagi ka inaam chahta hooñ | मुद्दत की तिश्नगी का इनआम चाहता हूँ

  - Hafeez Banarasi
मुद्दतकीतिश्नगीकाइनआमचाहताहूँ
मस्तीभरीनज़रसेइकजामचाहताहूँ
गर्दिश-ए-ज़मानाज़हमततोहोगीतुझको
कुछदेरकेलिएमैंआरामचाहताहूँ
कलहमसेकहरहाथाशोहरत-तलबज़माना
तुमकामचाहतेहोमैंनामचाहताहूँ
सुब्ह-ए-हयातलेलेज़ुल्फ़-ए-यारलेकिन
मैंतुझसेइसकेबदलेइकशामचाहताहूँ
बाद-ए-सबासकहदोमेरीतरफ़भीआए
मैंभी'हफ़ीज़'उनकापैग़ामचाहताहूँ
  - Hafeez Banarasi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy