kabhi jab mil ke rahte the vo sohbat yaad aati hai | कभी जब मिल के रहते थे वो सोहबत याद आती है

  - Habeeb Saifi
कभीजबमिलकेरहतेथेवोसोहबतयादआतीहै
हमेंअपनेबुज़ुर्गोंकीशराफ़तयादआतीहै
किसीभीमासियतसेमैंहमेशादूररहताहूँ
किहरलम्हामुझेमाँकीनसीहतयादआतीहै
हरइकदरबंदकरताहूँकिशबतोचैनसेगुज़रे
तूजबपहलूमेंहोताथावोसाअ'तयादआतीहै
कभीऔराक़माज़ीकेपलटलेताहूँफ़ुर्सतमें
तिरीबे-कारबातोंकीभीहुज्जतयादआतीहै
मिलीदौलतजोदुनियाकीबढ़ींबेज़ारियाँदिलकी
सुकूँसेजिसमेंरहतेथेवोग़ुर्बतयादआतीहै
तबीअ'तफिरसेअपनीढूँढतीहैज़ाइक़ा'सैफ़ी'
हसींदिलकशअदाओंकीभीलज़्ज़तयादआतीहै
  - Habeeb Saifi
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