raat ke lambe saa.e | रात के लम्बे साए

  - H. B. Baloch
रातकेलम्बेसाए
पैरोंसेलिपटतेहैं
मेरेहम-सफ़र
हमा-तन-गोशरहना
रक़्ससेज़रादेरपहले
गर्मख़ूनकीलौनाचतीहै
औरबेताबीहमेशा
चाँदकोपाँवलगादेतीहै
हमकिसीदिनया
सूरजकीबातनहींकररहे
क्यातुम्हेंपतानहीं
ख़्वाबऔरकोंपलेंरातकोउगतीहैं
औरदिनमेंकाटीजातीहैं
  - H. B. Baloch
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