ज़िंदगी दिल पे 'अजब सेहर सा करती जाए

  - Ghulam Rabbani Taban
ज़िंदगीदिलपे'अजबसेहरसाकरतीजाए
इकजगहठहरीलगेऔरगुज़रतीजाए
आँसुओंसेकोईआवाज़कोनिस्बतसही
भीगतीजाएतोकुछऔरनिखरतीजाए
देखतेदेखतेधुँदलागएमंज़रसारे
तेरीज़ुल्फ़ोंकीतरहशामबिखरतीजाए
बातकाराज़खुलेबातकाअंदाज़खुले
तेरेहोंटोंसेचलेदिलमेंउतरतीजाए
रफ़्तारफ़्ताकिसीगुम-नामलहूकीतहरीर
क़ातिल-ए-शहरकेदामनपेउभरतीजाए
होकेबर्बादचलेसेहन-ए-चमनसेनिकहत
दश्त-ओ-सहराकीमगरझोलियाँभरतीजाए
मैंनेकबदावा-ए-इल्हामकियाहै'ताबाँ'
लिखदियाकरताहूँजोदिलपेगुज़रतीजाए
  - Ghulam Rabbani Taban
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