ham ne battakh ke chhe ande | हम ने बत्तख़ के छे अंडे

  - Ghulam Abbas
हमनेबत्तख़केछेअंडे
इकमुर्ग़ीकेनीचेरक्खे
फूटेअंडेपच्चीसदिनमें
बोलरहेथेबच्चेजिनमें
बच्चेनिकलेप्यारेप्यारे
मुर्ग़ीकीआँखोंकेतारे
रंगथापीलाचोंचमेंलाली
आँखेंउनकीकालीकाली
चोंचथीचौड़ीपंजाचपटा
बाक़ीचूज़ोंकासानक़्शा
बच्चेख़ुशथेमुर्ग़ीख़ुशथी
हमभीख़ुशथेवोभीख़ुशथी
मुर्ग़ीचुगतीकटकटकरती
लेकेउनकोबाग़मेंपहुँची
जम्अ'''हुएवाँबच्चेउसदम
कौसरताशीनीलोमरियम
कौसरजोथीछोटीबच्ची
भोली-भालीअक़्लकीकच्ची
उसनेझटइकचूज़ालेकर
फेंकदियातालाबकेअंदर
कीयेशरारतइसफुरतीसे
रहगएहमसबकहते
चूज़ाजोथानन्हामुन्ना
हमसमझेबसअबयेडूबा
लेकिनसाहबवोचूज़ातो
करगयाहैराँपलमेंसबको
पानीसेकुछभीडरावो
पहलेझिजकाफिरसँभलावो
ख़ूबहीतैराछपछपकरके
चोंचमेंअपनीपानीभरके
बच्चोंनेफिरबाक़ीचूज़े
डालदिएतालाबमेंसारे
होनेलगीफिरख़ूबग़ड़पग़प
छपछपछपछपछपछपछपछप
मुर्ग़ीकाँपीहौलकेमारे
जापहुँचीतालाबकिनारे
कटकटकरकेउनकोबुलाया
इकभीबच्चापासआया
शायदवोसमझेनहींबोली
बढ़गईआगेउनकीटोली
  - Ghulam Abbas
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