zikr tumne kiya magar phir bhi | ज़िक्र तुमने किया मगर फिर भी

  - gaurav saklani
ज़िक्रतुमनेकियामगरफिरभी
होरहाक्यूँनहींअसरफिरभी
तोड़केरखदियामुझेजिसने
लगरहाहैमुझेक़मरफिरभी
खाईथीक़स
मेंअबदेखेंगे
रहाहैवहींनज़रफिरभी
थकगएमुझकोतुममिटानेमें
होरहाहैगुज़र-बसरफिरभी
ज़िंदगीक्यूँतुझेशिकायतहै
देदियाख़ून-ए-दिलजिगरफिरभी
"एकशायर"ग़ज़लसुनाताहै
बहरसदूरहैडगरफिरभी
  - gaurav saklani
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