kuchh ishaare the jinhen duniya samajh baithe the hamus nigaah-e-aashna ko kya samajh baithe the ham | कुछ इशारे थे जिन्हें दुनिया समझ बैठे थे हम

  - Firaq Gorakhpuri
कुछइशारेथेजिन्हेंदुनियासमझबैठेथेहम
उसनिगाह-ए-आश्नाकोक्यासमझबैठेथेहम
रफ़्तारफ़्ताग़ैरअपनीहीनज़रमेंहोगए
वाह-रीग़फ़्लततुझेअपनासमझबैठेथेहम
होशकीतौफ़ीक़भीकबअहल-ए-दिलकोहोसकी
इश्क़मेंअपनेकोदीवानासमझबैठेथेहम
पर्दा-ए-आज़ुर्दगीमेंथीवोजान-ए-इल्तिफ़ात
जिसअदाकोरंजिश-ए-बेजासमझबैठेथेहम
क्याकहेंउल्फ़तमेंराज़-ए-बे-हिसीक्यूँँकरखुला
हरनज़रकोतेरीदर्द-अफ़ज़ासमझबैठेथेहम
बे-नियाज़ीकोतिरीपायासरासरसोज़दर्द
तुझकोइकदुनियासेबेगानासमझबैठेथेहम
इंक़लाब-ए-पय-ब-पयहरगर्दिशहरदौरमें
इसज़मीनआसमाँकोक्यासमझबैठेथेहम
भूलबैठीवोनिगाह-ए-नाज़अहद-ए-दोस्ती
उसकोभीअपनीतबीअ'तकासमझबैठेथेहम
साफ़अलगहमकोजुनून-ए-आशिक़ीनेकरदिया
ख़ुदकोतेरेदर्दकापर्दासमझबैठेथेहम
कानबजतेहैंमोहब्बतकेसुकूत-ए-नाज़को
दास्ताँकाख़त्महोजानासमझबैठेथेहम
बातोंबातोंमेंपयाम-ए-मर्गभीहीगया
उननिगाहोंकोहयात-अफ़्ज़ासमझबैठेथेहम
अबनहींताब-ए-सिपास-ए-हुस्नइसदिलकोजिसे
बे-क़रार-ए-शिकव-ए-बेजासमझबैठेथेहम
एकदुनियादर्दकीतस्वीरनिकलीइश्क़को
कोह-कनऔरक़ैसकाक़िस्सासमझबैठेथेहम
रफ़्तारफ़्ताइश्क़मानूस-ए-जहाँहोताचला
ख़ुदकोतेरेहिज्रमेंतन्हासमझबैठेथेहम
हुस्नकोइकहुस्नहीसमझेनहींऔर'फ़िराक़'
मेहरबाँना-मेहरबाँक्याक्यासमझबैठेथेहम
  - Firaq Gorakhpuri
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