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Faraz Ansari
ham haadson se seekhte har baat hi rahe
हम हादसों से सीखते हर बात ही रहे
- Faraz Ansari
हम
हादसों
से
सीखते
हर
बात
ही
रहे
रोशन
हुए
तो
चूमते
ज़ुलमात
ही
रहे
दरिया
है
आग
का
तो
चलें
पार
डूब
कर
मुमकिन
है
सिर्फ़
बोलने
की
बात
ही
रहे
वा'दा
तो
कर
रहे
हो
मगर
ये
भी
सोच
लो
कल
भी
यही
हक़ीक़त-ए-जज़्बात
ही
रहे
तुम
डिग्रियों
के
ज़ोर
पे
हर
चाल
ही
चलो
ये
ढाल
छोड़
दो
तो
फ़क़त
मात
ही
रहे
- Faraz Ansari
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बहना
था
इक
क़लम
में
से
बेबाक
बेसबब
झटका
गया
जो
ज़ोर
से
मैं
दाग़
हो
गया
Faraz Ansari
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बना
कर
रास्ता
जाओगे
रस्ते
से
भटक
सुन
लो
घना
जंगल
उजाड़ेगी
फ़क़त
ये
इक
सड़क
सुन
लो
Faraz Ansari
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जो
इस
में
लज़्ज़त-ए-फ़ितना
नहीं
है
तुम्हें
बस
इस
लिए
टिकना
नहीं
है
था
जितना
भी
मिरा
वो
सब
तुम्हारा
तुम्हें
था
रंज
बस
कितना
नहीं
है
ख़ुदा
ने
खू़ब
बख़्शा
इल्म
मुझ
को
किसी
को
छल
सकूँ
उतना
नहीं
है
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Faraz Ansari
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राह-ए-सुख़न
में
ढंग
का
उस्ताद
चाहिए
और
बन
सके
जो
साथ
ही
हम-ज़ाद
चाहिए
लाज़िम
नहीं
के
आला
ही
दर्जे
का
हो
ज़की
मिलजुल
के
जो
सुधार
दे
बुनियाद
चाहिए
चुन
चुन
के
अब
तलाश
लो
मिसरों
के
खोट
तुम
कर
लूँ
इन्हें
दुरुस्त
तो
फिर
दाद
चाहिए
ऐसा
नहीं
के
एक
जमाअत
बड़ी
सी
हो
हो
चंद
का
ही
क़ाफ़िला
आबाद
चाहिए
मैं
आज़मा
चुका
सभी
बख़्शे
हुए
हुनर
कोई
नई
सी
लज़्ज़त-ए-ईजाद
चाहिए
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Faraz Ansari
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