नफ़रत की आँधियों को मोहब्बत में ढाल कर

  - Fauzia Shaikh
नफ़रतकीआँधियोंकोमोहब्बतमेंढालकर
तन्हाखड़ीहूँदश्तमेंरिश्तेसँभालकर
मुझकोतोतेरेदर्दभीतुझसेअज़ीज़हैं
बैठीहूँदेखप्यारसेझोलीमेंडालकर
ता'बीरढूँडतेहुएरस्ताभटकगईं
ख़्वाबोंसमेतफेंकदींआँखेंनिकालकर
शोहरतकमारहेहोतुमअख़बारकीतरह
अपनेपराएलोगोंकीपगड़ीउछालकर
इकख़ुश-गुमानअक्सकीबै'अतसेपेशतर
ख़ुश-बख़्तआइनेसेतोरिश्ताबहालकर
छायाहुआहैबाग़मेंख़ौफ़-ओ-हिरासक्यों
सहमेहुएगुलाबहैंख़ुशबूसँभालकर
या-रबकहाँसेलातेहैंयेलोगहौसला
काँटोंमेंफेंकदेतेहैंफूलोंकोपालकर
  - Fauzia Shaikh
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