jab andhera hi faqat aaya nazar har soo mujheus andheri raat meraa mil gaya jugnoo mujhe | जब अँधेरा ही फ़क़त आया नज़र हर सू मुझे

  - Fauzan Aoon Azmi
जबअँधेराहीफ़क़तआयानज़रहरसूमुझे
उसअँधेरीरातमेरामिलगयाजुगनूमुझे
आजमुश्किलसेमिलाहैआपपरक़ाबूमुझे
अपनेआँखोंकाज़रासिखलाइएजादूमुझे
घेरलेचारोतरफ़सेफूलकीख़ुशबूमुझे
बज़्ममेंगरहोमुयस्सरआपकापहलूमुझे
मैंहूँनाबीनाबताएकोईक्याआताहैवो
रहीहैइसतरफ़सेआजउसकीबूमुझे
हैमेरीख़्वाहिशयतीमोंकाबनूँमैंआसरा
औरदेदेज़िन्दगीतूऔरदेबाज़ूमुझे
देदियामुझकोग़म-ए-हिजरांकेहाथोमेंतमाम
येबताकिसमुँहसेअपनाअबकहेगातूमुझे
बादमुद्दतदेखकरकेदेखताहीरहगया
भूलहीबैठाहोजैसेकरकोवोमदऊ़मुझे
वक्त-ए-रुख़्सतआबदीदाहोनाजाऊँढाँपले
तेरीजानिबखींचतेहैंक्यौंतेरेगेसूमुझे
क्यातेरीनज़रोंमेंइससेनीमतरअच्छाहूँमैं
जितनाअच्छालगरहाहैपरीरूतूमुझे
मैंतेरेकमरेमेंलटकीसीनरीमेंक़ैदहूँ
रोज़तुझसेबोलताहूँपासआकरछूमुझे
नाख़ुदा-ए-जी़स्तउसनेमुझकोअपनामानकर
मोःतमिदहोकरदियाहैनावकाचप्पूमुझे
सोचकरखु़शहोताहूँमैंदेखकरकेग़म-ज़दा
कितनेमानीख़ेज़लगतेहैंतेरेआँसूमुझे
चश्म-ए-जानासेमिलाफ़ौज़ानफ़न्नेशा'इरी
पैकर-ए-जानाकेहसरतमेंमिलीउर्दूमुझे
  - Fauzan Aoon Azmi
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