har ek cheez hai faani faqat hayaat nahin | हर एक चीज़ है फ़ानी फ़क़त हयात नहीं

  - Farhat Shahzad
हरएकचीज़हैफ़ानीफ़क़तहयातनहीं
ब-जुज़ख़ुदाकेकिसीकोयहाँसबातनहीं
हयातनामहीतब्दीलियोंकाहैजानाँ
बदलगएहोजोतुमभीतोकोईबातनहीं
करमहैयेमिरेदोएकख़ासयारोंका
तबाहियोंमेंमिरीदुश्मनोंकाहाथनहीं
किजैसेदिलनहींसीनेमेंदुखधड़कताहै
जहाँभीजाऊँअलमसेकहींनजातनहीं
ग़ज़बकासिलसिलाथमनेहीमेंनहींआता
ज़रासाप्यारहीमाँगाथाकाएनातनहीं
मैंज़ख़्मज़ख़्मसहीहौसलातोक़ाएमहै
शिकस्ता-हालतोहूँपरयेमेरीमातनहीं
चलीगईहोजोतुमभीतोक्यागिलातुमसे
यहाँतोयूँँहैकिमैंख़ुदभीअपनेसाथनहीं
सहरभीघरमिरे'शहज़ाद'तीरगीलाई
क़ुसूर-वारमिरीजानसिर्फ़रातनहीं
  - Farhat Shahzad
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