tu apne hone ka har ik nishaan sanbhaal ke mil | तू अपने होने का हर इक निशाँ सँभाल के मिल

  - Farhat Abbas Shah
तूअपनेहोनेकाहरइकनिशाँसँभालकेमिल
यक़ींसँभालकेमिलऔरगुमाँसँभालकेमिल
हमअपनेबारेकभीमुश्तइ'लनहींहोते
फ़क़ीरलोगहैंहमसेज़बाँसँभालकेमिल
वजूद-ए-वाहिमावीरानियोंमेंघूमताहै
येबे-कराँहैतोफिरबे-कराँसँभालकेमिल
येमरहलेहैंअजबइसलिएसमुंदरसे
हुआकोथामकेमिलबादबाँसँभालकेमिल
अगरचेदोस्तहैंसारेहीआस-पासमगर
उसूलयेहैकितीर-ओ-कमाँसँभालकेमिल
तूकैसीग़ैर-यक़ीनीफ़ज़ामेंमिलताहै
कोईतोलम्हाकभीदरमियाँसँभालकेमिल
फिरउसकेबा'दतोशायदरहेरहेरहे
तमामउम्रकासूद-ओ-ज़ियाँसँभालकेमिल
  - Farhat Abbas Shah
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy