झूटी ही तसल्ली हो कुछ दिल तो बहल जाए

  - Fana Nizami Kanpuri
झूटीहीतसल्लीहोकुछदिलतोबहलजाए
धुंदलीहीसहीलेकिनइकशम्अतोजलजाए
इसमौजकीटक्करसेसाहिलभीलरज़ताहै
कुछरोज़तोतूफ़ाँकीआग़ोशमेंपलजाए
मजबूरी-ए-साक़ीभीतिश्ना-लबोसमझो
वाइज़कायेमंशाहैमय-ख़्वारोंमेंचलजाए
जल्वा-ए-जानानाफिरऐसीझलकदिखला
हसरतभीरहेबाक़ीअरमाँभीनिकलजाए
इसवास्तेछेड़ाहैपरवानोंकाअफ़्साना
शायदतेरेकानोंतकपैग़ाम-ए-अमलजाए
मय-ख़ाना-ए-हस्तीमेंमै-कशवहीमै-कशहै
सँभलेतोबहकजाएबहकेतोसँभलजाए
हमनेतो'फ़ना'इतनामफ़्हूम-ए-ग़ज़लसमझा
ख़ुदज़िंदगी-ए-शा'इरअशआ'रमेंढलजाए
  - Fana Nizami Kanpuri
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