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Faisal Hashmi
KHvaab chuntee hui aañkhen hain parindon ki tarah
KHvaab chuntee hui aañkhen hain parindon ki tarah | ख़्वाब चुनती हुई आँखें हैं परिंदों की तरह
- Faisal Hashmi
ख़्वाब
चुनती
हुई
आँखें
हैं
परिंदों
की
तरह
और
ये
जिस्म
कि
जैसे
कोई
बे-बर्ग
शजर
ग़ैर-वाज़ेह
सा
तसव्वुर
कोई
मुबहम
सा
ख़याल
किस
तरह
रात
की
दहलीज़
कोई
पार
करे
- Faisal Hashmi
तेरे
यादों
की
छोटी
खिड़कियों
से
तुझे
हर
रोज़
जी
भर
देखता
हूँ
Umesh Maurya
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लौट
कर
नहीं
आता
कब्र
से
कोई
लेकिन
प्यार
करने
वालों
को
इंतज़ार
रहता
है
Shabeena Adeeb
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तुझे
भूल
जाने
की
कोशिशें
कभी
कामयाब
न
हो
सकीं
तिरी
याद
शाख़-ए-गुलाब
है
जो
हवा
चली
तो
लचक
गई
Bashir Badr
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तिरा
ख़याल
बहुत
देर
तक
नहीं
रहता
कोई
मलाल
बहुत
देर
तक
नहीं
रहता
उदास
करती
है
अक्सर
तुम्हारी
याद
मुझे
मगर
ये
हाल
बहुत
देर
तक
नहीं
रहता
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Noon Meem Danish
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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तो
क्या
ऐसे
ही
रोना
आ
गया
था
नहीं
वो
याद
लहजा
आ
गया
था
Shadab Javed
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कभी
पहले
नहीं
था
जिस
क़दर
मजबूर
हूँ
मैं
आज
नज़र
आऊँ
न
ख़ुद
क्या
तुम
सेे
इतना
दूर
हूँ
मैं
आज
तुम्हारे
ज़ख़्म
को
ख़ाली
नहीं
जाने
दिया
मैंने
तुम्हारी
याद
में
ही
चीख़
के
मशहूर
हूँ
मैं
आज
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SHIV SAFAR
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गली
में
बैठे
हैं
उसकी
नज़र
जमाए
हुए
हमारे
बस
में
फ़क़त
इंतिज़ार
करना
है
Swapnil Tiwari
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इतना
तो
याद
है
इक
वा'दा
किया
था
लेकिन
हम
ने
क्या
वा'दा
किया
था
हमें
ये
याद
नहीं
Bismil Dehlavi
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ज़ख़्म
लगे
हैं
कितने
दिल
पर
याद
करूँँ
या
तुमको
देखूँ
शाद
नहीं
हूँ
मैं
तुमको
नाशाद
करूँँ
या
तुमको
देखूँ
उम्र
गए
पे
तेरी
सूरत
और
मिरी
आँखें
टकराईं
उम्र
गए
में
सोची
वो
फ़रियाद
करूँँ
या
तुमको
देखूँ
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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जब
ख़ाक
उड़ाता
हुआ
नींदों
का
सफ़र
हो
फिर
क्यूँ
न
किसी
और
ही
दुनिया
से
गुज़र
हो
वो
मेरे
बराबर
से
निकल
आया
था
वर्ना
दीवार
न
थी
ऐसी
कि
जिस
में
कोई
दर
हो
मैं
जिस्म
से
गुज़रा
हूँ
यही
सोच
के
अक्सर
शायद
कि
तिरी
रूह
का
इस
राह
में
घर
हो
ये
कैसी
तमन्ना
है
कि
इस
दश्त
में
'फ़ैसल'
दरिया
हो
किनारा
हो
सफ़ीना
हो
भँवर
हो
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Faisal Hashmi
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