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Fahmi Badayuni
maut ki samt jaan chalti rahi
maut ki samt jaan chalti rahi | मौत की सम्त जान चलती रही
- Fahmi Badayuni
मौत
की
सम्त
जान
चलती
रही
ज़िंदगी
की
दुकान
चलती
रही
सारे
किरदार
सो
गए
थक
कर
बस
तिरी
दास्तान
चलती
रही
मैं
लरज़ता
रहा
हदफ़
बन
कर
मश्क़-ए-तीर-ओ-कमान
चलती
रही
उल्टी
सीधी
चराग़
सुनते
रहे
और
हवा
की
ज़बान
चलती
रही
दो
ही
मौसम
थे
धूप
या
बारिश
छतरियों
की
दुकान
चलती
रही
जिस्म
लम्बे
थे
चादरें
छोटी
रात
भर
खींच-तान
चलती
रही
पर
निकलते
रहे
बिखरते
रहे
ऊँची
नीची
उड़ान
चलती
रही
- Fahmi Badayuni
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झिझकता
हूँ
उसे
इल्ज़ाम
देते
कोई
उम्मीद
अब
भी
रोकती
है
Shariq Kaifi
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जब
भी
कोई
मंज़िल
हासिल
करता
हूँ
याद
बहुत
आती
हैं
तेरी
ता'रीफ़ें
Tanoj Dadhich
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ये
एक
बात
समझने
में
रात
हो
गई
है
मैं
उस
से
जीत
गया
हूँ
कि
मात
हो
गई
है
Tehzeeb Hafi
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यार
आसान
होती
नहीं
यह
कला
मौन
रहना
बड़ी
ही
चुनौती
रही
Aniket sagar
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जीत
भी
लूँ
गर
लड़ाई
तुम
से
मैं
तो
क्या
मिलेगा
हाथ
में
दोनों
के
बस
इक
टूटा
सा
रिश्ता
मिलेगा
कर
के
लाखों
कोशिशें
गर
जो
बचा
भी
लूँ
मैं
रिश्ता
तो
नहीं
फिर
मन
हमारा
पहले
के
जैसा
मिलेगा
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Ankit Maurya
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चला
है
जोश
में
मक़्तल
की
ओर
जोशीला
उसी
को
देख
के
कितनों
को
अक़्ल
आई
है
Tarun Bharadwaj
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मुझको
भी
ज़िद
करने
का
हक़
दो
साहब
मेरे
भीतर
भी
इक
बच्चा
रहता
है
Atul K Rai
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मैं
पा
सका
न
कभी
इस
ख़लिश
से
छुटकारा
वो
मुझ
से
जीत
भी
सकता
था
जाने
क्यूँँ
हारा
Javed Akhtar
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किसी
से
छोटी
सी
एक
उम्मीद
बाँध
लीजिए
मोहब्बतों
का
अगर
जनाज़ा
निकालना
है
Shakeel Jamali
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चिलचिलाती
धूप
है
और
पैर
में
चप्पल
नहीं
जिस्म
घाइल
है
मगर
ये
हौसला
घाइल
नहीं
Tanoj Dadhich
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उसे
ले
कर
जो
गाड़ी
जा
चुकी
है
मैं
शायद
उस
के
नीचे
आ
रहा
हूँ
Fahmi Badayuni
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बहुत
दुश्वार
है
रस्ता
हमारा
नहीं
कर
पाओगे
पीछा
हमारा
रुला
देगा
उसे
हँसना
हमारा
उसे
मा'लूम
है
क़िस्सा
हमारा
तसल्ली
दे
रहे
हैं
चारा-गर
को
समझ
लो
हाल
है
कैसा
हमारा
तुम्हारी
कॉपी
ने
ख़ाली
कराया
किताबों
से
भरा
बस्ता
हमारा
बिछड़ने
वाला
मुड़
कर
देख
लेता
तो
हम
को
घर
तो
मिल
जाता
हमारा
ख़ुदा
हाफ़िज़
अगर
तुम
कह
के
जाते
तो
कुछ
दिन
काम
चल
जाता
हमारा
बटन
बस
शर्ट
में
इक
टाँक
देते
तो
सब
ग़ुस्सा
उतर
जाता
हमारा
चलो
साझे
में
बज़्म-ए-दिल
सजाएँ
सजावट
आप
की
ख़र्चा
हमारा
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Fahmi Badayuni
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काश
वो
रास्ते
में
मिल
जाए
मुझ
को
मुँह
फेर
कर
गुज़रना
है
Fahmi Badayuni
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याद
रखने
में
ही
भलाई
है
मर
भी
सकते
हैं
भूलने
में
उसे
Fahmi Badayuni
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अदाकारी
बहुत
दुख
दे
रही
है
मैं
सच-मुच
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
Fahmi Badayuni
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